चिरंतन मौन (Eternal Silence)

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ओ! चिरंतन मौन, तू कह
सुप्त किस सागर में, तू कह
विलीन कोलाहल कहीं यों
छिपा किन किरणों में, तू कह!
ओ! चिरंतन मौन, तू आ
मिटा कर हर बात, तू आ
शोर ना पद-चाप का हो
लेकर शून्या सौगात, तू आ!
ओ! चिरंतन मौन, आ ले
भूत को मुझसे चुरा ले
छोड़ दे बस इसी पल को
और सारा जग हटा ले!
ओ! चिरंतन मौन, आजा
अतीत को मेरे जला जा
निर्भीक हो कर आग देदे,
राख गंगा में बहाजा!
ओ! चिरंतन मौन, आना
कुछ ना अपने साथ लाना
राह तेरी देखता हूँ,
सतत अपने में सामना
ओ, चिरंतन मौन आना!
ओ! चिरंतन मौन, आना
अतीत को मेरे मिटाना
चेतना के परम पद पर
नित निरंतर ध्यान देना!
ओ! चिरंतन मौन, आना!